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| स्तंभ A (समिति) | स्तंभ B (अध्यक्ष) |
| a. मूल अधिकार उप-समिति | i. राजेंद्र प्रसाद |
| b. राज्य समिति | ii. बी.आर. आंबेडकर |
| c. प्रारूप समिति | iii. जवाहरलाल नेहरू |
| d. संचालन समिति | iv. जे.बी. कृपलानी |
| स्तंभ A (पुरातत्वविद) | स्तंभ B (योगदान) |
| a. दया राम साहनी | i. मोहनजोदड़ो में मुहरें खोजीं |
| b. राखाल दास बनर्जी | ii. हड़प्पा में मुहरें खोजीं |
| c. आर.ई.एम. व्हीलर | iii. 'द स्टोरी ऑफ़ इंडियन आर्कियोलॉजी' लिखी |
| d. एस.एन. रॉय | iv. पुरातत्व में सैनिक परिशुद्धता का समावेश |
धर्मशास्त्रों में बंधुत्व, विवाह, जाति और शासक वंश के कड़े नियम प्रतिपादित थे, किंतु ऐतिहासिक साक्ष्य यह सिद्ध करते हैं कि समाज में इन नियमों का सर्वत्र पालन नहीं होता था:
1919 में प्रसिद्ध संस्कृत विद्वान वी.एस. सुकथांकर के नेतृत्व में पुणे के 'भांडारकर प्राच्य विद्या शोध संस्थान' (BORI) द्वारा महाभारत का समालोचनात्मक संस्करण तैयार करने का कार्य प्रारंभ हुआ।
कश्मीर और नेपाल से लेकर दक्षिण भारत में केरल व तमिलनाडु तक से विभिन्न लिपियों (शारदा, देवनागरी, बंगाली, ग्रंथ, मलयालम) में लिखी सैकड़ों पांडुलिपियां एकत्रित की गईं।
टीम ने प्रत्येक पांडुलिपि के प्रत्येक श्लोक की तुलना की और केवल उन्हीं श्लोकों को मुख्य पाठ में रखा जो सभी पांडुलिपियों में समान रूप से पाए गए।
यह परियोजना 47 वर्षों में 1966 में 13,000 पृष्ठों में प्रकाशित हुई। इसने सिद्ध किया कि पूरे भारत में महाभारत की मूल कथा में एकता थी, जबकि पाद-टिप्पणियों में क्षेत्रीय विविधताओं का अद्भुत दस्तावेजीकरण हुआ।
गांधीजी के लिए स्वतंत्रता केवल सत्ता हस्तांतरण नहीं थी; साधन की शुद्धि अनिवार्य थी और अहिंसा के बिना प्राप्त की गई आजादी स्थायी नहीं हो सकती।
पश्चिमी अनियंत्रित मशीनी सभ्यता के स्थान पर नैतिक मूल्यों और आत्मनिर्भर स्वायत्त ग्राम गणराज्यों की स्थापना पर बल दिया।
15 अगस्त 1947 को उत्सवों में शामिल न होकर कलकत्ता और नोआखली में दंगा पीड़ितों के बीच अनशन और प्रार्थना कर शांति स्थापित की।
समाज के सबसे निर्धन, वंचित (हरिजन) और अंतिम व्यक्ति के उत्थान को स्वाधीनता की वास्तविक कसौटी माना।
उत्तर: सिपाहियों ने कहा कि उन्होंने एक सदी तक अंग्रेजों की निष्ठापूर्वक सेवा की, परंतु जब गाय-सूअर की चर्बी लगे कारतूसों से उनके धर्म व आस्था (अकायद व मजहब) को नष्ट करने का षड्यंत्र रचा गया, तो अपनी आस्था की रक्षा के लिए हथियार उठाना अनिवार्य हो गया।
उत्तर: अंग्रेजों ने थर्ड लाइट कैवेलरी के घुड़सवारों को नए कारतूस दांतों से खींचने का हुक्म दिया और मना करने पर 84 सिपाहियों को हथकड़ियां-बेड़ियां डालकर 10 वर्ष की जेल में डाल दिया।
उत्तर: सिपाहियों और भारतीय राजाओं-मुखियाओं दोनों की सत्ता और धर्म पर ब्रिटिश राज का साझा खतरा था। राजाओं के राज्य छीने जा रहे थे और सिपाहियों का धर्म भ्रष्ट किया जा रहा था; अतः दोनों ने मिलकर दो वर्ष तक अपनी संप्रभुता व संस्कृति बचाने हेतु साझा संघर्ष किया।
उत्तर: बुद्ध मौखिक संवाद व बातचीत द्वारा जन-सामान्य को उपदेश देते थे, तथा प्राचीन भारतीय परंपरा में ज्ञान को कंठस्थ रखना और मौखिक रूप से संप्रेषित करना अधिक स्वाभाविक माना जाता था।
उत्तर: मौखिक संप्रेषण से शिक्षाएं जन-जन तक सीधे पहुंचीं, परंतु कालान्तर में व्यक्तिगत मतभेदों से बचने हेतु वैशाली संगीति में 'त्रिपिटक' का संकलन हुआ।
उत्तर: विनय पिटक में भिक्षुओं व संघ के नियम हैं; जबकि सुत्त पिटक में बुद्ध की मूल शिक्षाएं व उपदेश संकलित हैं।
उत्तर: यह व्यापार मैदानों को हिमालयी क्षेत्रों से सोना, तांबा, सीसा, औषधियां, कस्तूरी और ऊनी उत्पाद उपलब्ध कराता था।
उत्तर: मैदानी व्यापारियों को बहुमूल्य कच्चा माल मिला, जिसके बदले वे मैदानों के अतिरिक्त सूती वस्त्र, नमक, मसाले (हींग) और बर्तन बेचकर उच्च लाभ कमाते थे।
उत्तर: पहाड़ी लोग सोना, तांबा, सीसा, कस्तूरी, याक की पूंछ, शहद, मजीठ की जड़ें, शिकारी बाज लाते थे और बदले में कपड़े, नमक, हींग, गहने तथा कांच व मिट्टी के बर्तन लेकर जाते थे।
चंपारण (Champaran) — बिहार
गांधीजी का भारत में पहला सफल सत्याग्रह (1917), जहाँ उन्होंने तीनकठिया पद्धति के विरुद्ध नील किसानों के अधिकारों की रक्षा की।
अमृतसर (Amritsar) — पंजाब
13 अप्रैल 1919 को जलियांवाला बाग का नृशंस नरसंहार और रॉलेट एक्ट के विरुद्ध राष्ट्रव्यापी सत्याग्रह का प्रमुख केंद्र।
कच्छ जिला, गुजरात (खदिर बेट द्वीप)
त्रि-स्तरीय नगर योजना, उन्नत जल संचयन जलाशय और 10 बड़े अक्षरों वाला हड़प्पाई सूचना-पट्ट।
गुंटूर/पलनाडु जिला, आंध्र प्रदेश (कृष्णा नदी घाटी)
इक्ष्वाकु वंश के काल का प्रसिद्ध बौद्ध स्तूप, महाविहार एवं प्राचीन बौद्ध तीर्थ स्थल।
उत्तर प्रदेश (यमुना नदी तट)
अकबर, जहाँगीर और शाहजहाँ के काल में मुगल साम्राज्य की भव्य राजधानी।
उत्तरी कर्नाटक (दक्कन क्षेत्र)
मध्यकालीन आदिलशाही सल्तनत की राजधानी (गोल गुम्बज)।